skip to main
|
skip to sidebar
Blissful Accord
Search This Blog
Pages
Home
Showing posts with label
Hindi Poems
.
Show all posts
Showing posts with label
Hindi Poems
.
Show all posts
Thursday, April 26, 2012
क्या होता अगर मैं इन्सान न होता!
छोटी सी दुकान मेरी
बैठता दिन -भर मैं यहाँ
नुक्कड़ है यह मेरा
होता रोज़ तमाशा नया
कभी बारात नाचती
कभी जनाज़ा गुजरता
और मैं
हर रोज़ ये नज़ारा देखता
लोग नाचते तो ख़ुशी मिलती
और रोते तो ग़म
पर हर रोज़ के इस खेल से
यह मन गया है रम
गाड़ियों की कतार लम्बी
हैं शीशे उनके बंद
पर बैठता उनमें वही
हैं बाल जिनके कम
इन शीशों पर गंदगी नहीं जमती
जब वह नन्हे हाँथ अपना कमाल दिखाते हैं
बत्ती होती है हरी
और वह सरपट दौड़ लागाते हैं
भीख में मिलते उन कुछ सिक्कों को
वह जीने का सार बताते हैं
पर इस जीवन पर
मैं और आप परस्पर तरस खाते हैं
सुबह से शाम बीत जाती
और यह दुनिया चलती जाती
मैं बैठता और सोचता
क्या होता अगर मैं इन्सान न होता
क्या तब भी बारात नाचती
और जनाज़ा रोता
और उन नन्हे से हांथों में मैं
सपनो को धुन्धता ?
भ्रष्टाचार का विचार…
भ्रष्टाचार का विचार,
क्यूँ आए मन में बार-बार,
क्या काफी नहीं है यह छोटा सा संसार ?
सोचो कैसा होगा सदाचार,
वो कहते हैं “ डूबेगी हर सरकार
अगर कर लिया इससे सरोकार
न गाड़ी, न बंगला,
न घर में सोने का अचार,
हाए ! होगी यह ज़िन्दगी बेकार !”
और उसका क्या जिसका तुमने खाया ?
भूल गए भाई का प्यार ?
वादे किये बड़े प्यारे-प्यारे,
लगे जो उनको सबसे न्यारे !
कभी बिजली, कभी पानी,
तो कभी सरकार की दुलार,
भूले यह सारे !
नेता के प्यारे !
उस मिट्टी के घर में,
जो नाले पर बस्ता है
तेरा भाई सुख-चैन से कहाँ रहता है !
मच्छर के काट से उसका बच्चा बीमार,
और पैसे की तंगी ने हमेशा किया बुरा हाल,
रोते और कहते हैं, “मारडाला !
पैसे की भूख ने क्या न कर डाला !
बच्चे तेरे दो तो उसके चार,
पर करता तू सिर्फ उनका व्यापर !
जाना सब को है एक बार,
जहाँ फैसला होगा इस-पार या उस-पार
सोचना ज़रूर एक बार,
क्यूँ नहीं दिया भाई को अधिकार !
गद्दी की भूख ने कर दिया तुझको अन्धा
बना दिया तुने Corruption को धंधा !”
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)
Facebook Badge
Roohi Sahay
Create Your Badge
Followers
Blog Archive
▼
2012
(6)
▼
April
(6)
क्या होता अगर मैं इन्सान न होता!
भ्रष्टाचार का विचार…
The Happiness before Death!
The Innocent Eyes
Me Still Going!
Problems of integration between Eurasian and Weste...
►
2010
(5)
►
October
(1)
►
September
(2)
►
April
(2)
About Me
Roohi
I believe in myself and the happiness around. Absorb the good things and everytime hope for the best to come..:)
View my complete profile